Tuesday, August 23, 2011

तुम से प्यार करके

तुम से प्यार करके क्या खोया क्या पाया है
बस हर बार तेरे लिए खुद को आजमाया है
तनहा अकेले थे जब मिले थे हम तुझसे
आज फिर खुद को तनहा ही पाया है

सोचा था कट जायेगी जिंदगी तेरे बाहों में
और अब न भटके गे इन अँधेरी राहों में
आज पता लगा के बो जो साथ चलता रहा
और कोई न था मेरी ही साया है

आइना बन गया है अब यह चेहरा मेरा
अक्स दीखता है हर पल इस में तेरा
डूबे रहता है हर पल ग़मों की महफ़िल में
लोग कहते है आज फिर पी के आया है

इंतजार है अब मुझे बस मौत का और तेरा
जाने कब होगा यह मेरा इंतजार पूरा
आएगी जब भी दरबाजे पर कोई दस्तक
उठ के देखेंगे पहले कौन आया है

चलो फिर माफ कर देना तुम हमको
के अलबिदा भी न कह पाए हम तुमको
जब ही झपके अकेले में पलके तेरी
सोच लेना तेरा चाहने बाला आया है

Monday, October 11, 2010

क्या से क्या हो गया हूँ में


क्या था और क्या हो कर रह गया हूँ में
तेरे हाथों का खिलौना बन के रह गया हूँ में
जो तो करता है करूं तेरी शिकायत तुझसे
तेरी बातों में उलझ कर रह जाता हूँ में
दिल तो करता है के ना मिलूं तुमसे
खुद को दूर कर लूं में अब खुद से
फिर ना जाने क्या हो जाता है मुझे
अपने बादों से ही मुकर जाता हूँ में
लाख शिकबे होते है रोज कहने को
तुम तो कह देती हो आज रहने दो
दर्द के बादल छुपा कर रखे है मैंने
अकेले में बारिश सा बरसता हूँ में
आप जब भी मिलने मुझसे से आते है
सारे शिकबे फिजा में घुल जाते है
आपके जाते ही एक तूफान सा आता है
तिनके की तरह हवा में बिखर जाता हूँ में
रोज बातें में कई सोच कर आता हूँ
देख कर तुझको सब कुछ भूल जाता हूँ
तेरी आँखों में जब भी देखता हूँ सनम
अपने शिकबों पर खुद ही शरमा जाता हूँ में
कैसे कहूँ तुमसे मेरे दिल मैं क्या है
एक तरफ तू तो इक तरफ यह जहान है
कैसे समझाऊँ में तुम दोनों को तुम ही कहो
ऐसा करता हूँ खुद ही मिट जाता हूँ में

Friday, October 8, 2010

इतनी सी तमन्ना है मेरी


जगाए है अब मुझे सारी सारी रात
तेरे यह हसींन मेहँदी लगे हाथ
खो गए है चैन ओ करार मेरे
जब से हूई है तुमसे मुलाकात
हालत मेरी यह क्या हो गई है
जिंदगी मेरी तुझ में ही खो गई है
चैन अब मिलता ही नही कही भी
जाने कैसी आई है अब के बरसात
कटता है यही सोच सोच कर के दिन
कैसे सुनाए तुम्हे हाल ए दिल
देखते ही तुझ में ही खो जाता हूँ में
तुम कहो कैसे कहे दिल की बात
जब से हम तेरे दीवाने हूए है
खुद से ही हम अनजाने हूए है
होंठो से गर में ने कुछ कह पाऊँ में
आँखों से ही समझ लो ना मेरे जज्बात
इतना प्यार अजनबी तुझ से करता हूँ
के रोज तेरे नाम के सजदे करता हूँ
खुदा को भी में भूल जाऊँगा में
गर मिल जाए जो मुझे तेरा साथ

Thursday, October 7, 2010

कुछ ऐसी है बो


उसकी सांसों से फूलों की महक आती है
नशा बन के बो मेरे दिल पे छा जाती है
छूप जाते है सारे चाँद सितारे आसमान के
बन संबर कर जब बो घर से आती है
रौनक नही है कोई अब मयखानो में
सारा शहर है अब उसके दीवानों में
उसके आने से होती है महफिले जबान
उसके के जाते ही ख़ामोशी छा जाती है
हंस हंस कर जब बो बात करते है
जाने कितने दीवाने आहें भरते है
जब बो देखते है नजरे झुका कर मुझे
सच कहता हूँ मेरी जान पे बन आती है
देखी है जब से झील से गहरी ऑंखें
तब से नशीली हो हो गई है मेरी राते
छाया है कैसा जादू यह उसके हुस्न का
हवा भी गीत उनके ही गुनगुनाती है
इक ही नजर में जाने क्या हो गया
दिल यह मेरा दीवाना उनका हो गया
उनको ना देखूं तो चैन मिलता ही नहीं
देख लूं तो मदहोशी सी छा जाती है

Tuesday, October 5, 2010

हम क्या इतने बुरे थे


तुम हो शायद बाग की बो नाजुक कली
जिसे किसी सुंदर सपने की तलाश है
और हम है कौन जो बैठे है तेरी राहों में
जो खुद ही गमो की चलती फिरती लाश है


में तेरे काबिल ही नहीं हूँ मेरे दोस्त अब
मुझे भी धीरे धीरे यहीं यह हो गया है
गर तुझे भूले भी तो भूले भी कैसे
तू मेरा मेरा सपना था जो अधूरा रह गया है
उम्र भर के साथ की बात तो दूर रही
तुम तो साथ मेरे दो कदम भी नहीं चल सकते
चलो अब कितना रोए अब अपनी किस्मत को
कहा हम गलियों की धुल और तुम हुस्न के फरिस्ते
दो पल भी बात नही कर सकते तुम हमसे
इस को में बदनसीबी न कहूँ तो फिर क्या कहूँ
सब दुआए तेरे नाम की जो सोची थी अपने लिए
तुम भी दुआ करना जहा रहूँ बस गम में रहूँ

ऐसा भी क्या हो गया था !


उस दिन ना जाने क्या बात हूई
तुम बेमतलब ही हमसे नाराज हूई
तुम्हारी आँखें तो भारी थी बस
मेरी आखों से तो अश्को की बरसात हूई
तुम बो तो बन सके जो चाहा था दिल ने
पर तुम एक अच्छे दोस्त तो बन सकते थे
गर राज नही बन सकते थे मेरे दिल के
मेरे दर्द के हमराज तो बन सकते थे
शायद तुम्हे अच्छा नही लगता हम से बात करना
क्यों की तुम हो खूबसूरत और हम नही है
इस जन्म की बात छोड़ देते है साथी
अगले जन्म पूरी हो जाये जो कमी हम में रही है
में भी नही चाहता सारे जहान में तेरी रुस्बाई हो
गर बात ना करना चाहो तो मत करो हमसे
बैसे भी बक्त कहा है हम दोनों का पास
तुम्हे फुर्सत नही गेरों से हमें फुर्सत नही गम से
तुमसे मिलना और तुम्हे देखना बस यही तो
एक बहाना था इन गलियों में बार बार आने का
यह भी क्या बात हूई की बस इसी बात पर
ए दोस्त पता बदल दिया तुमने अपने ठिकाने का
ना बहाना चंद आसूं जो याद मेरी आए
गर आंसूं बहे तो तेरा एक और एहसान हो जायेगा
यु भी थक गया हूँ में ग़मों का बोझ उठा कर के
फिर कब्र में भी चैन से सोया ना जायेगा

Monday, October 4, 2010

क्या प्यार में यही होता है


तुमसे मिलना तो चाहता हूँ मगर
तुमसे मिलने से भी डर लगता है
खुशी तो होती है आपसे मिलने में
मगर मिल के बिछड़ने का डर लगता है


जब से मिली है नजरे तुम से सनम
यह जीबन बस एक सपना सा लगता है
जिसके नाम कर दी यह जिंदगी आपनी
पता नही है मुझे की बो म्रेरा क्या लगता है
जब पास तुम होते हो हमदम मेरे
बक्त ना जाने क्यों रुका रुका सा लगता है
तेरे बिन अकेली सिसकती रातों में सनम
हवा का झोका भी मुझे तूफान सा लगता है
दुनिया में और खूबसूरती होगी ही नही
तुम्हे देख कर तो बस यही मुझे लगता है
ए मेरे दिल की धडकनों की दुआ सुन तो
तू ही मुझे आपनी महोबत का खुदा लगता है